Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.55.35: मैं अकेला ही उन राजदेवी लक्ष्मी को प्राप्त करने में असमर्थ हूँ और मुझे अपने समीप कोई योग्य सहायक नहीं मिलता; इसीलिए मैं मृत्यु का विचार कर रहा हूँ ॥35॥ | mahabharat अध्याय 2.55: दुर्योधनका मयनिर्मित सभाभवनको देखना और पग-पगपर भ्रमके कारण उपहासका पात्र बनना तथा युधिष्ठिरके वैभवको देखकर उसका चिन्तित होना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं अकेला ही उन राजदेवी लक्ष्मी को प्राप्त करने में असमर्थ हूँ और मुझे अपने समीप कोई योग्य सहायक नहीं मिलता; इसीलिए मैं मृत्यु का विचार कर रहा हूँ ॥35॥
I alone am incapable of seizing that royal goddess Lakshmi and I do not find any capable helper near me; that is why I contemplate death. ॥ 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥