Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.55.19: मार्ग में चलते हुए वह नाना प्रकार के विचारों से चिन्तित हो रहा था। वह केवल परम बुद्धिमान धर्मराज युधिष्ठिर और अतुलनीय देवी लक्ष्मी की अद्भुत सभा के विषय में ही चिन्तित हो रहा था।॥19॥   |   mahabharat अध्याय 2.55: दुर्योधनका मयनिर्मित सभाभवनको देखना और पग-पगपर भ्रमके कारण उपहासका पात्र बनना तथा युधिष्ठिरके वैभवको देखकर उसका चिन्तित होना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 55: दुर्योधनका मयनिर्मित सभाभवनको देखना और पग-पगपर भ्रमके कारण उपहासका पात्र बनना तथा युधिष्ठिरके वैभवको देखकर उसका चिन्तित होना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.55.19 
स तु गच्छन्ननेकाग्र: सभामेकोऽन्वचिन्तयत्।
श्रियं च तामनुपमां धर्मराजस्य धीमत:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
मार्ग में चलते हुए वह नाना प्रकार के विचारों से चिन्तित हो रहा था। वह केवल परम बुद्धिमान धर्मराज युधिष्ठिर और अतुलनीय देवी लक्ष्मी की अद्भुत सभा के विषय में ही चिन्तित हो रहा था।॥19॥
 
While going on the way, he was worried with various kinds of thoughts. He alone was thinking about the wonderful assembly of the most intelligent Dharmaraja Yudhishthira and the incomparable goddess Lakshmi.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)