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आकारं रक्षमाणस्तु न स तान् समुदैक्षत।
पुनर्वसनमुत्क्षिप्य प्रतरिष्यन्निव स्थलम्॥ १०॥
अनुवाद
उसने अपने चेहरे के भाव छिपाने के लिए उनकी तरफ़ देखा ही नहीं। फिर, जैसे ही ज़मीन पर पानी दिखाई दिया, उसने अपने कपड़े उठाए और ऐसे चलने लगा मानो तैरने की तैयारी कर रहा हो।
He did not look at them to hide the expression on his face. Then, as the water appeared on land, he raised his clothes and started walking as if he was preparing to swim.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥