Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.54.30: अपने बड़े भाई के वचन सुनकर समस्त पाण्डव उनके हित में अनुरक्त हो गए और सदैव उनका अनुसरण करने लगे ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 2.54: व्यासजीकी भविष्यवाणीसे युधिष्ठिरकी चिन्ता और समत्वपूर्ण बर्ताव करनेकी प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 54: व्यासजीकी भविष्यवाणीसे युधिष्ठिरकी चिन्ता और समत्वपूर्ण बर्ताव करनेकी प्रतिज्ञा  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  2.54.30 
भ्रातुर्ज्येष्ठस्य वचनं पाण्डवा: संनिशम्य तत्।
तमेव समवर्तन्त धर्मराजहिते रता:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
अपने बड़े भाई के वचन सुनकर समस्त पाण्डव उनके हित में अनुरक्त हो गए और सदैव उनका अनुसरण करने लगे ॥30॥
 
After listening to their elder brother's words, all the Pandavas became devoted to his welfare and started following him always. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)