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mahabharat 2.53.d4: उस महान यज्ञ में राजसेवक ब्राह्मणों को सदैव नाना प्रकार के स्वादिष्ट चावल तथा चावल से बने अनेक अन्य व्यंजन परोसते थे। वे उन्हें मीठे पेय भी देते थे।   |   mahabharat अध्याय 2.53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन  »  श्लोक d4
 
 
श्लोक  2.53.d4 
ओदनानां विकाराणि स्वादूनि विविधानि च।
सुबहूनि च भक्ष्याणि पेयानि मधुराणि च।
ददुर्द्विजानां सततं राजप्रेष्या महाध्वरे॥
 
 
अनुवाद
उस महान यज्ञ में राजसेवक ब्राह्मणों को सदैव नाना प्रकार के स्वादिष्ट चावल तथा चावल से बने अनेक अन्य व्यंजन परोसते थे। वे उन्हें मीठे पेय भी देते थे।
 
In that great yajna, the royal servants always served various kinds of delicious rice and many other eatables made of rice to the Brahmins. They also offered sweet drinks to them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)