व्यासं धौम्यं च प्रयतो नारदं च महामतिम्॥
सुमन्तुं जैमिनिं पैलं वैशम्पायनमेव च।
याज्ञवल्क्यं कठं चैव कलापं च महौजसम्।
सर्वांश्च विप्रप्रवरान् पूजयामास सत्कृतान्॥
अनुवाद
तब राजा युधिष्ठिर ने व्यास, धौम्य, महामती नारद, सुमन्तु, जैमिनी, पैल, वैशम्पायन, याज्ञवल्क्य, कठ और महातेजस्वी कलाप - इन सभी महान ब्राह्मणों का पूरी भक्ति से सम्मान और पूजा की।
Then King Yudhishthir honored and worshiped Vyas, Dhaumya, Mahamati Narada, Sumantu, Jaimini, Pail, Vaishampayan, Yajnavalkya, Kath and Mahatejasvi Kalap - all these great Brahmins with full devotion.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥