गन्धर्वगणसंकीर्ण: शोभितोऽप्सरसां गणै:॥
देवैर्मुनिगणैर्यक्षैर्देवलोक इवापर:।
स किम्पुरुषगीतैश्च किन्नरैरुपशोभित:॥
अनुवाद
वह यज्ञ मंडप गंधर्वों, अप्सराओं, देवताओं, ऋषियों और यक्षों से सुशोभित, मानो स्वर्ग सा लग रहा था। किंपुरुषों और किन्नरों के गीत उस स्थान की शोभा बढ़ा रहे थे।
That Yajna Mandap looked like another heaven, decorated with Gandharvas, Apsaras, Gods, sages and Yakshas. The songs of Kimpurushas and Kinnars were adding to the beauty of that place.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥