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mahabharat 2.53.d19: देवताओं, दानवों, यक्षों, नागों, दिव्य मनुष्यों और विद्वानों से युक्त, बुद्धिमान पाण्डु नन्दन महात्मा धर्मराज का वह राजसूय यज्ञ अत्यन्त सुन्दर था।   |   mahabharat अध्याय 2.53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.53.d19 
देवैरन्यैश्च यक्षैश्च उरगैर्दिव्यमानुषै:।
विद्याधरगणै: कीर्ण: पाण्डवस्य महात्मन:॥
स राजसूय: शुशुभे धर्मराजस्य धीमत:।
 
 
अनुवाद
देवताओं, दानवों, यक्षों, नागों, दिव्य मनुष्यों और विद्वानों से युक्त, बुद्धिमान पाण्डु नन्दन महात्मा धर्मराज का वह राजसूय यज्ञ अत्यन्त सुन्दर था।
 
That Rajasuya Yagya of the wise Pandu Nandan Mahatma Dharmaraja, filled with gods, demons, yakshas, snakes, divine humans and scholars, was very beautiful.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)