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mahabharat 2.53.d18: वेद-शास्त्रों के ज्ञाता ब्राह्मण वहाँ सदैव प्रवचन करते रहते थे। उस महायज्ञ में कथा के अंत में सभी लोग बहुत प्रसन्न होते थे।   |   mahabharat अध्याय 2.53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.53.d18 
ब्राह्मणा वेदशास्त्रज्ञा: कथाश्चक्रुश्च सर्वदा।
रेमिरे च कथान्ते तु सर्वे तस्मिन् महाक्रतौ॥
 
 
अनुवाद
वेद-शास्त्रों के ज्ञाता ब्राह्मण वहाँ सदैव प्रवचन करते रहते थे। उस महायज्ञ में कथा के अंत में सभी लोग बहुत प्रसन्न होते थे।
 
Brahmins who knew the Vedas and scriptures always used to give discourses there. In that great yagya, everyone used to feel very happy at the end of the story.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)