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mahabharat 2.53.11: इस क्रूर पुरुष ने माया के द्वारा अपना वास्तविक रूप छिपाकर (अपने मामा विशालनराज की पुत्री भद्रा को, जो करुषराज को प्राप्त करने के लिए तपस्या कर रही थी, छल करके) उसका अपहरण कर लिया॥11॥   |   mahabharat अध्याय 2.53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.53.11 
एष मायाप्रतिच्छन्न: करूषार्थे तपस्विनीम्।
जहार भद्रां वैशालीं मातुलस्य नृशंसकृत्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
इस क्रूर पुरुष ने माया के द्वारा अपना वास्तविक रूप छिपाकर (अपने मामा विशालनराज की पुत्री भद्रा को, जो करुषराज को प्राप्त करने के लिए तपस्या कर रही थी, छल करके) उसका अपहरण कर लिया॥11॥
 
'This cruel person, concealing his true form through illusion, abducted (by deceiving his maternal uncle Vishalanraj's daughter Bhadra, who was performing penance to attain Karusharaj)॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)