श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.53.10 
सौवीरान् प्रति यातां च बभ्रोरेष तपस्विन:।
भार्यामभ्यहरन्मोहादकामां तामितो गताम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
इतना ही नहीं, कामवश उसने तपस्वी बभ्रु की पत्नी का भी हरण कर लिया, जो यहाँ से द्वारका जाते हुए सौवीरदेश में पहुँची थी और जो उसमें किंचितमात्र भी स्नेह नहीं रखती थी॥10॥
 
Not only this, out of lust he also abducted the wife of the ascetic Babhru, who had reached Sauviradesh on her way to Dvaraka from here and who did not have the slightest affection for him.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)