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mahabharat 2.52.7: भीष्म! यदि तुम्हारा मन सदैव दूसरों की प्रशंसा करने में ही लगा रहता है, तो इस जनार्दन को छोड़कर इन राजाओं की ही प्रशंसा करो।   |   mahabharat अध्याय 2.52: भीष्मकी बातोंसे चिढ़े हुए शिशुपालका उन्हें फटकारना तथा भीष्मका श्रीकृष्णसे युद्ध करनेके लिये समस्त राजाओंको चुनौती देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 52: भीष्मकी बातोंसे चिढ़े हुए शिशुपालका उन्हें फटकारना तथा भीष्मका श्रीकृष्णसे युद्ध करनेके लिये समस्त राजाओंको चुनौती देना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.52.7 
संस्तवे च मनो भीष्म परेषां रमते यदि।
तदा संस्तौषि राज्ञस्त्वमिमं हित्वा जनार्दनम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
भीष्म! यदि तुम्हारा मन सदैव दूसरों की प्रशंसा करने में ही लगा रहता है, तो इस जनार्दन को छोड़कर इन राजाओं की ही प्रशंसा करो।
 
Bhishma! If your mind is always inclined towards praising others then leave this Janardan and praise these kings only.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)