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mahabharat 2.52.37: हे राजाओं! हम सब लोग क्रोध में भरकर इस मूर्ख भीष्म को पशु के समान गला घोंटकर मार डालें अथवा तृण और घास की अग्नि में जीवित ही जला दें॥37॥   |   mahabharat अध्याय 2.52: भीष्मकी बातोंसे चिढ़े हुए शिशुपालका उन्हें फटकारना तथा भीष्मका श्रीकृष्णसे युद्ध करनेके लिये समस्त राजाओंको चुनौती देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 52: भीष्मकी बातोंसे चिढ़े हुए शिशुपालका उन्हें फटकारना तथा भीष्मका श्रीकृष्णसे युद्ध करनेके लिये समस्त राजाओंको चुनौती देना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  2.52.37 
हन्यतां दुर्मतिर्भीष्म: पशुवत् साध्वयं नृपा:।
सर्वै: समेत्य संरब्धैर्दह्यतां वा कटाग्निना॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
हे राजाओं! हम सब लोग क्रोध में भरकर इस मूर्ख भीष्म को पशु के समान गला घोंटकर मार डालें अथवा तृण और घास की अग्नि में जीवित ही जला दें॥37॥
 
'O kings! All of us filled with anger should together kill this foolish Bhishma by strangling him like an animal or burn him alive in a fire made of straw and hay.'॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)