Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.52.22: भीष्म! यदि आपका मन सदैव दूसरों की प्रशंसा करने में ही लगा रहता है, तो आप शल्य आदि महान राजाओं की प्रशंसा क्यों नहीं करते?॥ 22॥   |   mahabharat अध्याय 2.52: भीष्मकी बातोंसे चिढ़े हुए शिशुपालका उन्हें फटकारना तथा भीष्मका श्रीकृष्णसे युद्ध करनेके लिये समस्त राजाओंको चुनौती देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 52: भीष्मकी बातोंसे चिढ़े हुए शिशुपालका उन्हें फटकारना तथा भीष्मका श्रीकृष्णसे युद्ध करनेके लिये समस्त राजाओंको चुनौती देना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.52.22 
शल्यादीनपि कस्मात् त्वं न स्तौषि वसुधाधिपान्।
स्तवाय यदि ते बुद्धिर्वर्तते भीष्म सर्वदा॥ २२॥
 
 
अनुवाद
भीष्म! यदि आपका मन सदैव दूसरों की प्रशंसा करने में ही लगा रहता है, तो आप शल्य आदि महान राजाओं की प्रशंसा क्यों नहीं करते?॥ 22॥
 
Bhishma! If your mind is always inclined towards praising others, then why do you not praise these great kings like Shalya etc.?॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)