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mahabharat 2.52.10: महाबाहो! कर्ण के ये दो दिव्य कुण्डल उसके जन्म के समय प्रकट हुए हैं। किसी देवता ने इन कुण्डलों का निर्माण किया है। कुण्डलों के साथ ही उसके शरीर पर यह दिव्य कवच भी जन्म के समय प्रकट हुआ है, जो प्रातःकालीन सूर्य के समान चमक रहा है।॥10॥   |   mahabharat अध्याय 2.52: भीष्मकी बातोंसे चिढ़े हुए शिशुपालका उन्हें फटकारना तथा भीष्मका श्रीकृष्णसे युद्ध करनेके लिये समस्त राजाओंको चुनौती देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 52: भीष्मकी बातोंसे चिढ़े हुए शिशुपालका उन्हें फटकारना तथा भीष्मका श्रीकृष्णसे युद्ध करनेके लिये समस्त राजाओंको चुनौती देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.52.10 
यस्येमे कुण्डले दिव्ये सहजे देवनिर्मिते।
कवचं च महाबाहो बालार्कसदृशप्रभम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! कर्ण के ये दो दिव्य कुण्डल उसके जन्म के समय प्रकट हुए हैं। किसी देवता ने इन कुण्डलों का निर्माण किया है। कुण्डलों के साथ ही उसके शरीर पर यह दिव्य कवच भी जन्म के समय प्रकट हुआ है, जो प्रातःकालीन सूर्य के समान चमक रहा है।॥10॥
 
Mahabaho! These two divine earrings of Karna have appeared at the time of his birth. Some deity has created these earrings. Along with the earrings, this divine armour on his body has also appeared at birth, which is shining like the morning sun.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)