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mahabharat 2.51.6: तत्पश्चात आकाशवाणी सुनकर उसकी माता अपने पुत्र के प्रति प्रेम से परिपूर्ण हो गई और बोली - ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 2.51: भीष्मजीके द्वारा शिशुपालके जन्मके वृत्तान्तका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 51: भीष्मजीके द्वारा शिशुपालके जन्मके वृत्तान्तका वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.51.6 
संश्रुत्योदाहृतं वाक्यं भूतमन्तर्हितं तत:।
पुत्रस्नेहाभिसंतप्ता जननी वाक्यमब्रवीत्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात आकाशवाणी सुनकर उसकी माता अपने पुत्र के प्रति प्रेम से परिपूर्ण हो गई और बोली - ॥6॥
 
Thereafter, after hearing this voice from the sky, his mother became filled with love for her son and said - ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)