Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.51.19: यह देखकर बालक की माता भयभीत हो गई और हृदय में व्याकुल हो उठी। उसने श्रीकृष्ण से वर माँगते हुए कहा- 'हे महाबाहु श्रीकृष्ण! मैं भय से व्याकुल हो रही हूँ। कृपया मुझे इस पुत्र के प्राण बचाने का वर दीजिए।॥19॥   |   mahabharat अध्याय 2.51: भीष्मजीके द्वारा शिशुपालके जन्मके वृत्तान्तका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 51: भीष्मजीके द्वारा शिशुपालके जन्मके वृत्तान्तका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.51.19 
तद् दृष्ट्वा व्यथिता त्रस्ता वरं कृष्णमयाचत।
ददस्व मे वरं कृष्ण भयार्ताया महाभुज॥ १९॥
 
 
अनुवाद
यह देखकर बालक की माता भयभीत हो गई और हृदय में व्याकुल हो उठी। उसने श्रीकृष्ण से वर माँगते हुए कहा- 'हे महाबाहु श्रीकृष्ण! मैं भय से व्याकुल हो रही हूँ। कृपया मुझे इस पुत्र के प्राण बचाने का वर दीजिए।॥19॥
 
Seeing this, the child's mother became frightened and was distressed in her heart. She asked for a boon from Shri Krishna and said- 'O mighty-armed Shri Krishna! I am getting restless with fear. Please give me a boon to save the life of this son.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)