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mahabharat 2.51.17: महादेवी श्रुतश्रवणे ने बड़े प्रेम से उन दोनों वीरों का स्वागत किया और स्वयं अपने पुत्र को श्रीकृष्ण की गोद में बिठा दिया॥17॥   |   mahabharat अध्याय 2.51: भीष्मजीके द्वारा शिशुपालके जन्मके वृत्तान्तका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 51: भीष्मजीके द्वारा शिशुपालके जन्मके वृत्तान्तका वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.51.17 
साभ्यर्च्य तौ तदा वीरौ प्रीत्या चाभ्यधिकं तत:।
पुत्रं दामोदरोत्सङ्गे देवी संन्यदधात् स्वयम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
महादेवी श्रुतश्रवणे ने बड़े प्रेम से उन दोनों वीरों का स्वागत किया और स्वयं अपने पुत्र को श्रीकृष्ण की गोद में बिठा दिया॥17॥
 
Mahadevi Shrutashravane welcomed those two heroes with great love and herself placed her son in the lap of Shri Krishna. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)