Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.50.3: सबसे पहले (चैत्यकगिरि के शिखर को तोड़कर) उसने बिना किसी द्वार के नगर में प्रवेश किया। उसने अपना वेश भी बदला और स्वयं को ब्राह्मण बताया। इस प्रकार इस कृष्ण ने राजा जरासंध का प्रभाव देखा। 3. | mahabharat अध्याय 2.50: शिशुपालकी बातोंपर भीमसेनका क्रोध और भीष्मजीका उन्हें शान्त करना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सबसे पहले (चैत्यकगिरि के शिखर को तोड़कर) उसने बिना किसी द्वार के नगर में प्रवेश किया। उसने अपना वेश भी बदला और स्वयं को ब्राह्मण बताया। इस प्रकार इस कृष्ण ने राजा जरासंध का प्रभाव देखा। 3.
First of all (by breaking the peak of Chaityakagiri) he entered the city without any doors. He also disguised himself and made himself known as a Brahmin. In this way this Krishna saw the influence of King Jarasandh. 3.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥