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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 50: शिशुपालकी बातोंपर भीमसेनका क्रोध और भीष्मजीका उन्हें शान्त करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.50.11 
त्रिशिखां भ्रुकुटीं चास्य ददृशु: सर्वपार्थिवा:।
ललाटस्थां त्रिकूटस्थां गङ्गां त्रिपथगामिव॥ ११॥
 
 
अनुवाद
सभी राजाओं ने देखा कि उसके माथे पर तीन रेखाएं उभर आई हैं, मानो तीन मार्गों से बहती हुई गंगा त्रिकूट पर्वत पर बहने लगी हो।
 
All the kings saw that his forehead had become tense with three lines on it, as if the Ganges flowing in three paths had started flowing on the Trikuta mountain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)