Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.49.34: भीष्म! हंस पर विश्वास रखने के कारण वे सभी पक्षी अपने अंडे हंस के पास छोड़कर समुद्र के जल में गोते लगाते और इधर-उधर विचरण करते; किन्तु वह पापी हंस उनके सारे अंडे खा जाता। | mahabharat अध्याय 2.49: शिशुपालद्वारा भीष्मकी निन्दा । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ते च तस्य समभ्याशे निक्षिप्याण्डानि सर्वश:।
समुद्राम्भस्यमज्जन्त चरन्तो भीष्म पक्षिण:।
तेषामण्डानि सर्वेषां भक्षयामास पापकृत्॥ ३४॥
अनुवाद
भीष्म! हंस पर विश्वास रखने के कारण वे सभी पक्षी अपने अंडे हंस के पास छोड़कर समुद्र के जल में गोते लगाते और इधर-उधर विचरण करते; किन्तु वह पापी हंस उनके सारे अंडे खा जाता।
Bhishma! Due to their trust in the swan, all those birds would leave their eggs near the swan and dive and roam around in the ocean water; but that sinful swan would eat all their eggs.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥