श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 49: शिशुपालद्वारा भीष्मकी निन्दा  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.49.27 
इष्टं दत्तमधीतं च यज्ञाश्च बहुदक्षिणा:।
सर्वमेतदपत्यस्य कलां नार्हन्ति षोडशीम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
यज्ञ, दान, स्वाध्याय और बड़े-बड़े दानों सहित बड़े-बड़े यज्ञ - ये सब संतान के सोलहवें भाग के बराबर भी नहीं हो सकते ॥ 27॥
 
Sacrifices, charity, self-study and large sacrifices with large donations - all these cannot even be equal to one-sixteenth of the children.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)