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mahabharat 2.48.12: 'बुद्धिमानों में श्रेष्ठ कुन्तीनन्दन युधिष्ठिर! आपका कल्याण हो। निश्चय ही इन चेदिराज शिशुपालकी तथा इन समस्त भूपालों की बुद्धि भ्रष्ट हो गई है। 12॥   |   mahabharat अध्याय 2.48: युधिष्ठिरकी चिन्ता और भीष्मजीका उन्हें सान्त्वना देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 48: युधिष्ठिरकी चिन्ता और भीष्मजीका उन्हें सान्त्वना देना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.48.12 
विप्लुता चास्य भद्रं ते बुद्धिर्बुद्धमतां वर।
चेदिराजस्य कौन्तेय सर्वेषां च महीक्षिताम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
'बुद्धिमानों में श्रेष्ठ कुन्तीनन्दन युधिष्ठिर! आपका कल्याण हो। निश्चय ही इन चेदिराज शिशुपालकी तथा इन समस्त भूपालों की बुद्धि भ्रष्ट हो गई है। 12॥
 
'Kuntinandan Yudhishthir, the best among the wise! May you be well. Surely this Chediraj Shishupalaki and all these Bhupalas have been brainwashed. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)