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mahabharat 2.46.d53-d54: हे भरतश्रेष्ठ! जो अग्नि और सूर्य के समान बलवान थे, वरुणदेवता के दोनों ओर विचरण करते थे तथा पलक झपकते ही एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँच जाने की शक्ति रखते थे, उन्हें गोपति और तालकेतु भगवान श्रीकृष्ण ने महेन्द्र पर्वत के शिखर पर इरावती नदी के तट पर पकड़कर मार डाला।   |   mahabharat अध्याय 2.46: भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा बाणासुरपर विजय और भीष्मके द्वारा श्रीकृष्ण-माहात्म्यका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.46.d53-d54 
महेन्द्रशिखरे चैव निमेषान्तरचारिणौ॥
जग्राह भरतश्रेष्ठ वरुणस्याभितश्चरौ।
इरावत्यामुभौ चैतावग्निसूर्यसमौ बले॥
गोपतिस्तालकेतुश्च निहतौ शार्ङ्गधन्वना।
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! जो अग्नि और सूर्य के समान बलवान थे, वरुणदेवता के दोनों ओर विचरण करते थे तथा पलक झपकते ही एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँच जाने की शक्ति रखते थे, उन्हें गोपति और तालकेतु भगवान श्रीकृष्ण ने महेन्द्र पर्वत के शिखर पर इरावती नदी के तट पर पकड़कर मार डाला।
 
Bharatshrestha! Those who were like fire and sun in strength and roamed on both sides of Varunadevata and had the power to reach from one place to another in the blink of an eye, were caught and killed by Gopati and Talketu Lord Shri Krishna on the banks of river Iravati on the peak of Mahendra mountain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)