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mahabharat 2.46.d39-d40: उसके घर में जो भी पशु या अन्य धन था, यदुवंश की कीर्ति बढ़ाने वाले भगवान हृषिकेश ने वह सब ले लिया। फिर मधुसूदन ने शीघ्रता से उन सभी रत्नों को ले जाकर गरुड़ पर रख दिया।   |   mahabharat अध्याय 2.46: भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा बाणासुरपर विजय और भीष्मके द्वारा श्रीकृष्ण-माहात्म्यका उपसंहार   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 46: भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा बाणासुरपर विजय और भीष्मके द्वारा श्रीकृष्ण-माहात्म्यका उपसंहार  »  श्लोक d39-d40
 
 
श्लोक  2.46.d39-d40 
गोधनान्यथ सर्वस्वं स बाणस्यालये बलात्।
जहार च हृषीकेशो यदूनां कीर्तिवर्धन:॥
तत: स सर्वरत्नानि चाहृत्य मधुसूदन:।
क्षिप्रमारोपयाञ्चक्रे तत् सर्वं गरुडोपरि॥
 
 
अनुवाद
उसके घर में जो भी पशु या अन्य धन था, यदुवंश की कीर्ति बढ़ाने वाले भगवान हृषिकेश ने वह सब ले लिया। फिर मधुसूदन ने शीघ्रता से उन सभी रत्नों को ले जाकर गरुड़ पर रख दिया।
 
Whatever cattle or any other wealth was present in his house, Lord Hrishikesh, who increased the glory of the Yadu clan, took them all away. Then Madhusudan quickly took all those gems and placed them on Garuda.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)