Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.46.d23: बाणासुर की राजधानी में अनेक देवता सदैव द्वार पर बैठकर पहरा देते थे। महाराज! भगवान शंकर, कार्तिकेय, भद्रकाली देवी और अग्नि - ये देवता सदैव उस नगर की रक्षा करते थे। | mahabharat अध्याय 2.46: भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा बाणासुरपर विजय और भीष्मके द्वारा श्रीकृष्ण-माहात्म्यका उपसंहार । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्य बाणपुरस्यासन् द्वारस्था देवता: सदा।
महेश्वरो गुहश्चैव भद्रकाली च पावक:॥
एता वै देवता राजन् ररक्षुस्तां पुरीं सदा।
अनुवाद
बाणासुर की राजधानी में अनेक देवता सदैव द्वार पर बैठकर पहरा देते थे। महाराज! भगवान शंकर, कार्तिकेय, भद्रकाली देवी और अग्नि - ये देवता सदैव उस नगर की रक्षा करते थे।
In Banasura's capital, many gods always used to sit at the gate and guard it. King! Lord Shankar, Kartikeya, Bhadrakali Devi and Agni - these gods always used to protect that city.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥