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श्लोक  2.46.d19 
अथासाद्य महाराज तत्पुरीं ददृशुश्च ते॥
ताम्रप्राकारसंवीतां रूप्यद्वारैश्च शोभिताम्।
 
 
अनुवाद
महाराज! वहाँ जाकर उन्होंने बाणासुर की नगरी देखी, जो ताँबे की दीवार से घिरी हुई थी। चाँदी के दरवाजे उसकी शोभा बढ़ा रहे थे।
 
Maharaj! Going there he saw Banasura's city, which was surrounded by a copper wall. The doors made of silver were enhancing its beauty.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)