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श्लोक  2.46.d14 
एतस्मिन्नेव काले तु नारदो मुनिपुङ्गव:।
द्वारकां प्राप्य कौन्तेय कृष्णं दृष्ट्वा वचोऽब्रवीत्॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीकुमार! इसी समय महर्षि नारदजी द्वारका में आये और श्रीकृष्ण से मिलकर इस प्रकार बोले।
 
Kuntikumar! At this time, great sage Naradji came to Dwarka and met Shri Krishna and spoke thus.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)