श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 46: भगवान् श्रीकृष्णके द्वारा बाणासुरपर विजय और भीष्मके द्वारा श्रीकृष्ण-माहात्म्यका उपसंहार  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  2.46.d1 
भीष्म उवाच
द्वारकायां तत: कृष्ण: स्वदारेषु दिवानिशम्।
सुखं लब्ध्वा महाराज प्रमुमोद महायशा:॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं- महाराज युधिष्ठिर! तत्पश्चात तेजस्वी भगवान श्रीकृष्ण अपनी रानियों के साथ द्वारकापुरी में दिन-रात सुख का अनुभव करते हुए सुखपूर्वक रहने लगे।
 
Bhishmaji says- Maharaj Yudhishthir! Thereafter, the glorious Lord Shri Krishna started living happily in Dwarkapuri with his queens, experiencing happiness day and night.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)