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श्लोक  2.45.d97 
रामकृष्णौ समाश्लिष्य सर्वे चान्धकवृष्णय:॥
 
 
अनुवाद
अंधक और वृष्णि वंश के सभी लोग बलराम और श्रीकृष्ण से हृदय से प्रेम करते थे।
 
Andhaka and all the people of Vrishni dynasty loved Balaram and Shri Krishna with their hearts.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)