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mahabharat 2.45.d84: तत्पश्चात भगवान श्री कृष्ण ने गरुड़ के ऊपर बैठकर प्रसन्नतापूर्वक अपना श्वेत रंग का पांच शूल वाला शंख बजाया, जिससे शत्रुओं के रोंगटे खड़े हो जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 2.45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.45.d84 
ततस्तं पाण्डरं शौरिर्मूर्ध्नि तिष्ठन् गरुत्मत:॥
प्रीत: शङ्खमुपादध्मौ विद्विषां रोमहर्षणम्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात भगवान श्री कृष्ण ने गरुड़ के ऊपर बैठकर प्रसन्नतापूर्वक अपना श्वेत रंग का पांच शूल वाला शंख बजाया, जिससे शत्रुओं के रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
 
Thereafter, Lord Shri Krishna, sitting on top of Garuda, happily blew his white colored five-pronged conch, which gives goosebumps to the enemies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)