श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश  »  श्लोक d79
 
 
श्लोक  2.45.d79 
विश्वकर्मकृत: शैल: प्राकारस्तस्य वेश्मन:॥
व्यक्तं किष्कुशतोद्याम: सुधाकरसमप्रभ:।
 
 
अनुवाद
विश्वकर्मा द्वारा निर्मित पर्वत श्रृंखला उस विशाल भवन की चारदीवारी है। इसकी ऊँचाई सौ फुट है और यह चन्द्रमा के समान अपनी श्वेत छटा बिखेरती रहती है।
 
The mountain range built by Vishwakarma is the boundary wall of that huge building. Its height is a hundred feet and it keeps spreading its white shade like the moon.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)