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mahabharat 2.45.d54: वहाँ, समस्त भूतों के देखते-देखते, यमदूतों का महान संगीत बजता रहता है। वह भी भगवान कृष्ण की लीलास्थली है। वे तीनों लोकों में विख्यात हैं।   |   mahabharat अध्याय 2.45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.45.d54 
सकिन्नरमहानादं तदप्यमिततेजस:।
पश्यतां सर्वभूतानां त्रिषु लोकेषु विश्रुतम्॥
 
 
अनुवाद
वहाँ, समस्त भूतों के देखते-देखते, यमदूतों का महान संगीत बजता रहता है। वह भी भगवान कृष्ण की लीलास्थली है। वे तीनों लोकों में विख्यात हैं।
 
There, in full view of all the ghosts, the great sound of the music of the eunuchs continues. That too is the place of Lord Krishna's pastime. He is famous in all three worlds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)