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mahabharat 2.45.d5: सूर्य के समान चमकती हुई गगनचुम्बी श्वेत चारदीवारी से सुशोभित द्वारकापुरी श्वेत बादलों से घिरी हुई देवपुरी (अमरावती) के समान प्रतीत हो रही थी।   |   mahabharat अध्याय 2.45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.45.d5 
प्राकारेणार्कवर्णेन पाण्डरेण विराजिता।
वियन्मूर्ध्नि निविष्टेन द्यौरिवाभ्रपरिच्छदा॥
 
 
अनुवाद
सूर्य के समान चमकती हुई गगनचुम्बी श्वेत चारदीवारी से सुशोभित द्वारकापुरी श्वेत बादलों से घिरी हुई देवपुरी (अमरावती) के समान प्रतीत हो रही थी।
 
Dwarkapuri, adorned with a high sky-high white boundary wall shining like the sun, looked like Devpuri (Amaravati) surrounded by white clouds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)