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mahabharat 2.45.d19: देवपुरी की तरह इसकी चारदीवारी के पास छोटी-छोटी घंटियों से सुसज्जित आठ हजार रथ दिखाई दे रहे थे, जिनमें ध्वजाएं लहरा रही थीं।   |   mahabharat अध्याय 2.45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.45.d19 
अष्टौ रथसहस्राणि प्राकारे किङ्किणीकिन:।
समुच्छ्रितपताकानि यथा देवपुरे तथा॥
 
 
अनुवाद
देवपुरी की तरह इसकी चारदीवारी के पास छोटी-छोटी घंटियों से सुसज्जित आठ हजार रथ दिखाई दे रहे थे, जिनमें ध्वजाएं लहरा रही थीं।
 
Like Devpuri, near its boundary wall, eight thousand chariots decorated with small bells were seen, in which flags were fluttering.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)