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mahabharat 2.45.d18: भगवान ने तीक्ष्ण यंत्रों, शतघ्नी, विविध यंत्रों के समूह तथा लोहे के बने विशाल चक्रों से सुरक्षित द्वारकापुरी देखी।   |   mahabharat अध्याय 2.45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.45.d18 
तीक्ष्णयन्त्रशतघ्नीभिर्यन्त्रजालै: समन्विताम्।
आयसैश्च महाचक्रैर्ददर्श द्वारकां पुरीम्॥
 
 
अनुवाद
भगवान ने तीक्ष्ण यंत्रों, शतघ्नी, विविध यंत्रों के समूह तथा लोहे के बने विशाल चक्रों से सुरक्षित द्वारकापुरी देखी।
 
The Lord saw Dwarkapuri protected by sharp instruments, Shataghni, group of various instruments and huge chakras made of iron.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)