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mahabharat 2.45.d16: श्रीकृष्ण ने उस मनोरम महापुरी द्वारका में प्रवेश किया, जो पचास द्वारों से सुशोभित थी और चारों ओर से प्रकाशित थी।   |   mahabharat अध्याय 2.45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश  »  श्लोक d16
 
 
श्लोक  2.45.d16 
महापुरीं द्वारवतीं पञ्चाशद्भिर्मुखैर्युताम्।
प्रविष्टो द्वारकां रम्यां भासयन्तीं समन्तत:॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण ने उस मनोरम महापुरी द्वारका में प्रवेश किया, जो पचास द्वारों से सुशोभित थी और चारों ओर से प्रकाशित थी।
 
Shri Krishna entered that picturesque Mahapuri Dwaraka, adorned with fifty doors and illuminated from all sides.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)