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श्लोक  2.45.d14 
भाति चैत्ररथं चैव नन्दनं च महावनम्॥
रमणं भावनं चैव वेणुमन्तं समन्तत:।
 
 
अनुवाद
वेणुमंत पर्वत के चारों ओर चैत्ररथ, नन्दन, रमण और भवन नामक महान वन पाए जाते हैं।
 
On all sides of Venumant mountain, great forests named Chaitrarath, Nandana, Ramana and Bhavana are found.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)