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श्लोक  2.45.d138 
अथाक्षतमहावृष्टॺा लाजपुष्पघृतैरपि॥
वृष्णयोऽवाकिरन् प्रीता: संकर्षणजनार्दनौ।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात वृष्णि वंश के लोग प्रसन्न हो गए और उन्होंने बलराम और श्रीकृष्ण पर लाज (आटा), पुष्प और घी मिश्रित चावल की वर्षा की।
 
Thereafter, the Vrishni clan men became pleased and showered rice grains mixed with laja (flour), flowers and ghee on Balram and Shri Krishna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)