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mahabharat 2.45.d132: उस समय माता देवकी उन दोनों बैल के समान बड़े नेत्रों वाले पुत्रों के साथ ऐसी सुन्दर लग रही थीं, जैसे माता अदितिकि मित्र और वरुण के साथ सुन्दर लगती हैं।   |   mahabharat अध्याय 2.45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.45.d132 
सा ताभ्यामृषभाक्षाभ्यां पुत्राभ्यां शुशुभे तदा॥
देवकी देवमातेव मित्रेण वरुणेन च।
 
 
अनुवाद
उस समय माता देवकी उन दोनों बैल के समान बड़े नेत्रों वाले पुत्रों के साथ ऐसी सुन्दर लग रही थीं, जैसे माता अदितिकि मित्र और वरुण के साथ सुन्दर लगती हैं।
 
At that time, mother Devaki looked as beautiful with those two sons having eyes as large as the bull's, as mother Aditiki looks with Mitra and Varuna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)