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mahabharat 2.45.d123: इंद्रदेव पहले वायु मार्ग से वैश्वानरपथ पर पहुँचे, फिर सूर्यदेव के मार्ग पर चले और वहीं अदृश्य हो गए।   |   mahabharat अध्याय 2.45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.45.d123 
स वायुपथमास्थाय वैश्वानरपथं गत:।
प्राप्य सूर्यपथं देवस्तत्रैवान्तरधीयत॥
 
 
अनुवाद
इंद्रदेव पहले वायु मार्ग से वैश्वानरपथ पर पहुँचे, फिर सूर्यदेव के मार्ग पर चले और वहीं अदृश्य हो गए।
 
Indradev first reached the air path and reached Vaishwanarpath (glorious world). After that, he went on the path of Suryadev and disappeared there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)