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mahabharat 2.45.d122: मरुद्गण, कुबेर और वरुण आदि देवता हाथियों और विमानों के समूहों के साथ प्रसन्नतापूर्वक उनके पीछे-पीछे चले।   |   mahabharat अध्याय 2.45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.45.d122 
तं करेणुगजव्रातैर्विमानैश्च मरुद्‍गणा:।
पृष्ठतोऽनुययु: प्रीता: कुबेरवरुणग्रहा:॥
 
 
अनुवाद
मरुद्गण, कुबेर और वरुण आदि देवता हाथियों और विमानों के समूहों के साथ प्रसन्नतापूर्वक उनके पीछे-पीछे चले।
 
The gods like Marudgana, Kuber and Varun etc. followed them happily, accompanied by groups of elephants and planes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)