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mahabharat 2.45.d111: अब जब पुनः बाणासुर के वध का अवसर आएगा, तब मैं समस्त देवताओं, वसुओं और साध्यगणों के साथ मधुसूदन श्रीकृष्ण की सेवा में उपस्थित होऊँगा।   |   mahabharat अध्याय 2.45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.45.d111 
पुनर्बाणवधे शौरिमादित्या वसुभि: सह।
मन्मुखा हि गमिष्यन्ति साध्याश्च मधुसूदनम्॥
 
 
अनुवाद
अब जब पुनः बाणासुर के वध का अवसर आएगा, तब मैं समस्त देवताओं, वसुओं और साध्यगणों के साथ मधुसूदन श्रीकृष्ण की सेवा में उपस्थित होऊँगा।
 
Now when the opportunity of killing Banasura arises again, I along with all the Gods, Vasus and Sadhyagans will be present in the service of Madhusudan Shri Krishna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)