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mahabharat 2.45.d107: बुद्धिमान श्रीकृष्ण ने अपने पाश से मुर नामक दैत्य को कुचल डाला, पंचजन नामक दैत्यों का नाश कर दिया और चट्टानों पर से कूदकर सेवकों सहित निशुम्भ को मार डाला।   |   mahabharat अध्याय 2.45: द्वारकापुरी एवं रुक्मिणी आदि रानियोंके महलोंका वर्णन, श्रीबलराम और श्रीकृष्णका द्वारकामें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.45.d107 
सपाशं मुरमाक्रम्य पाञ्चजन्यं च धीमता।
शिलासङ्घानतिक्रम्य निशुम्भ: सगणो हत:।
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान श्रीकृष्ण ने अपने पाश से मुर नामक दैत्य को कुचल डाला, पंचजन नामक दैत्यों का नाश कर दिया और चट्टानों पर से कूदकर सेवकों सहित निशुम्भ को मार डाला।
 
The wise Shri Krishna crushed the demon named Mur along with his noose and destroyed the demons named Panchajan and jumping over the rocks killed Nisumbha along with his servants.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)