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mahabharat 2.44.d94: इसीलिए आज हम आपके परम प्रिय चन्द्रमा के समान मुख के दर्शन कर रहे हैं। हे परम पुरुष, आपके दर्शन मात्र से ही हमारी तृप्ति हो रही है।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d94
 
 
श्लोक  2.44.d94 
यत् प्रियं बत पश्याम वक्त्रं चन्द्रोपमं तु ते।
दर्शनेन कृतार्था: स्मो वयमद्य महात्मन:॥
 
 
अनुवाद
इसीलिए आज हम आपके परम प्रिय चन्द्रमा के समान मुख के दर्शन कर रहे हैं। हे परम पुरुष, आपके दर्शन मात्र से ही हमारी तृप्ति हो रही है।
 
That is why today we are seeing your most beloved moon-like face. We are fulfilled just by seeing you, the Supreme Being.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)