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mahabharat 2.44.d86: पुरुषोत्तम! इसी संकल्प से हम लोग राक्षसों द्वारा रक्षित होकर सदैव तपस्या करते आये हैं।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d86
 
 
श्लोक  2.44.d86 
इत्येवं हृदि संकल्पं कृत्वा पुरुषसत्तम॥
तपश्चराम सततं रक्ष्यमाणा हि दानवै:।
 
 
अनुवाद
पुरुषोत्तम! इसी संकल्प से हम लोग राक्षसों द्वारा रक्षित होकर सदैव तपस्या करते आये हैं।
 
Purushottam! With this resolve, we have always been performing penance, protected by the demons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)