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mahabharat 2.44.d59: यशस्वी नरक के घर जाकर उसने नाना प्रकार के रत्न और अक्षय धन देखा।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d59
 
 
श्लोक  2.44.d59 
अथास्य गृहमासाद्य नरकस्य यशस्विन:।
ददर्श धनमक्षय्यं रत्नानि विविधानि च॥
 
 
अनुवाद
यशस्वी नरक के घर जाकर उसने नाना प्रकार के रत्न और अक्षय धन देखा।
 
Going to the house of the glorious Naraka, he saw various kinds of gems and inexhaustible wealth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)