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mahabharat 2.44.d58: भीष्मजी कहते हैं- युधिष्ठिर! भूमिपुत्र नरकासुर का वध करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण सत्यभामा के साथ लोकपालों के साथ गए और नरकासुर का घर देखा।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d58
 
 
श्लोक  2.44.d58 
भीष्म उवाच
निहत्य नरकं भौम सत्यभामासहायवान्।
सहितो लोकपालैश्च ददर्श नरकालयम्॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं- युधिष्ठिर! भूमिपुत्र नरकासुर का वध करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण सत्यभामा के साथ लोकपालों के साथ गए और नरकासुर का घर देखा।
 
Bhishmaji says- Yudhishthir! After killing Narakasura, the son of Bhumi, Lord Krishna along with Satyabhama went with the Lokpals and saw the house of Narakasura.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)