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श्रीभगवानुवाच
देवानां च मुनीनां च पितॄणां च महात्मनाम्।
उद्वेजनीयो भूतानां ब्रह्मद्विट् पुरुषाधम:॥
लोकद्विष्ट: सुतस्ते तु देवारिर्लोककण्टक:।
अनुवाद
भगवान श्री ने कहा- भामिनी! तुम्हारा यह पुत्र देवताओं, ऋषियों, पितरों, महात्माओं और समस्त भूतों के क्रोध का भाजन बन रहा था। यह पुरुषधाम ब्राह्मणों से द्वेष करने वाला, देवताओं का शत्रु और सम्पूर्ण जगत का संहार करने वाला था, इसलिए सभी लोग इससे द्वेष करते थे।
Lord Shri said- Bhamini! This son of yours was becoming the object of anger of the gods, sages, ancestors, mahatmas and all the ghosts. This Purushadham was a hater of Brahmins, an enemy of the gods and a destroyer of the entire world, hence everyone hated him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥