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mahabharat 2.44.d53: भूमि बोली - प्रभु मधुसूदन! आपने ही इसे जन्म दिया और आपने ही इसका वध किया। अपनी इच्छानुसार लीला करके नरकासुर के बालक का पालन-पोषण कीजिए।   |   mahabharat अध्याय 2.44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 44: नरकासुरका सैनिकोंसहित वध, देवता आदिकी सोलह हजार कन्याओंको पत्नीरूपमें स्वीकार करके श्रीकृष्णका उन्हें द्वारका भेजना तथा इन्द्रलोकमें जाकर अदितिको कुण्डल अर्पणकर द्वारकापुरीमें वापस आना  »  श्लोक d53
 
 
श्लोक  2.44.d53 
भूमिरुवाच
सृष्टस्त्वयैव मधुहंस्त्वयैव निहत: प्रभो।
यथेच्छसि तथा क्रीडन् प्रजास्तस्यानुपालय॥
 
 
अनुवाद
भूमि बोली - प्रभु मधुसूदन! आपने ही इसे जन्म दिया और आपने ही इसका वध किया। अपनी इच्छानुसार लीला करके नरकासुर के बालक का पालन-पोषण कीजिए।
 
Bhumi said - Prabhu Madhusudan! You gave birth to him and you killed him. Take care of Narakasur's child by performing the leela as per your wish.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)